शैशवावस्था | STET/UPTET/CTET Most Important One Linear

  • जन्म से किशोरावस्था तक की गतिविधियों को बाल मनोविज्ञान कहते हैं।
  • शैशवावस्था जन्मों परान्त मानव विकास की प्रथम अवस्था है।
  • जन्म से लेकर 6 वर्ष तक की आयु को शैशवावस्था कहते हैं।
  • शैशवावस्था को अंग्रेजी में Infancy कहते हैं।
  • Infancy शब्द लैटिन भाषा के Infari शब्द से बना है।
  • Infari शब्द दो शब्दों से मिलकर In + Fari से बना है। In का मतलब ‘नहीं’ और Fari का मतलब ‘बोलना’ होता है।अर्थात शाब्दिक अर्थ होता है ‘बोलने के अयोग्य’
  • समाजीकरण की प्रक्रिया के प्रारम्भ होने की अवस्था शैशवावस्था है।
  • व्यक्तित्व विकास की नीव शैशवावस्था में पड़ती है।
  • थार्नडाइक का विचार है कि 3 से 6 वर्ष तक बच्चा अर्द्ध – स्वपनों में रहता है।
  • एक नवजात शिशु की ऊंचाई लगभग 51 सेमी० या 20 इंच होती है।
  • एक नवजात शिशु का भार लगभग 6 से 8 पाउंड होता है।
  • सामान्य बालक 9 से 15 माह के मध्य की आयु में ध्वनि उच्चारण करना शुरू कर देते हैं।
  • जन्म के समय शिशु के मस्तिष्क का भार लगभग 500 ग्राम होता है।
  • गर्भ में बालक को विकसित होने में 280 दिन लगते हैं।
  • शैशवावस्था में शारीरिक व मानसिक विकास में तीव्रता पायी जाती है।
  • शैशवावस्था में वृद्धि तीव्र होती है।
  • शैशवावस्था में बच्चो के सीखने की प्रक्रिया में तीव्रता पायी जाती है।
  • शैशवावस्था में  शिशुओं की जिज्ञासा की प्रवृत्ति बहुत तेज होती है।
  • शैशवावस्था में बच्चों का अधिकाँश व्यवहार मूल प्रवृत्तियों पर आधारित होता है।
  • शैशवावस्था के बालकों में दोहराने की प्रवृत्ति पायी जाती है।
  • शैशवावस्था में शिशु की प्रेम भावना काम प्रवृत्ति पर आधारित होती है। परन्तु शिशुओं में वयस्कों की तरह नहीं होती है।
  • शैशवावस्था में बालक कल्पना जगत में विचरण करने लगता है और उसी को वास्तविक दुनिया समझने लगता है।
  • जन्म के समय बच्चे का संवेगात्मक विकास उत्तेजनापूर्ण होता है।
  • विकास की प्रक्रिया गर्भावस्था से लेकर जीवन पर्यन्त तक होती है।
  • शैशवावस्था में चार संवेग भय, क्रोध, प्रेम, पीड़ा होते हैं।
  • शैशवावस्था को बालक का निर्माण काल कहा जाता है।
  • जन्म से पूर्व की अवस्था में ही दांत बनना शुरू हो जाते हैं।
  • एक वर्ष में सभी दूध के दांत निकल आते हैं।
  • दूध के दांतों की संख्या 20 होती है।
  • नवजात शिशु में हड्डियों की संख्या लगभग 270 होती है।
  • हड्डियों में कैल्शियम, फास्फोरस और खनिज तत्व पाये जाते हैं।
  • फ्रायड के अनुसार लड़कियों में इलेक्ट्रा ग्रंथि पायी जाती है।
  • फ्रायड के अनुसार लड़कों में ओडिपस ग्रंथि पायी जाती है।
  • शैशवावस्था में दोहराने की प्रवृत्ति तीव्र होती है।
  • शैशवावस्था के शिशुओं में स्वप्रेम का गुण पाया जाता है।
  • शैशवावस्था का बालक दूसरों के ऊपर निर्भर रहता है।
  • शैशवावस्था स्व केन्द्रित अवस्था होती है।
  • जन्म से समय शिशु की धड़कन अनियमित रहती है।
  • तीन वर्ष का बच्चा सार्थक शब्दों का प्रयोग करने लगता है।
  • जन्म के समय बालक, बालिका से आधा सेमी० लम्बा होता है।
  • भूख और प्यास जन्मजात प्रेरक हैं।
  • बालक की प्रथम पाठशाला परिवार होता है।
  • मनोवैज्ञानिकों के अनुसार छोटे बच्चों को 5 वर्ष की आयु में स्कूल भेजना चाहिए।

शैशवावस्था की महत्वपूर्ण परिभाषाएं 

  • “5 वर्ष तक की अवस्था शरीर और मस्तिष्क के लिए बड़ी ग्रहणशील रहती है।” – न्यूमैन 
  • ”मनुष्य को जो कुछ भी बनना होता है प्रारम्भ के चार पांच वर्षो में बन जाता है।” – फ्रायड 
  • ”शैशवावस्था द्वारा जीवन का पूरा क्रम निश्चित होता है।” – एडलर 
  • ”बीसवीं शताब्दी को बालक की शताब्दी माना जाता है।” – क्रो एण्ड क्रो 
  • ”व्यक्ति का जितना भी विकास होता है, उसका आधा तीन वर्ष की आयु तक हो जाता है।” – गुडएनफ 
  • ”वह सत्य और असत्य में भेद नहीं कर सकता है लेकिन इस काल में कल्पना की सजीवता पायी जाती है।” – कुप्पूस्वामी 
  • ”शैशवावस्था को सीखने का आदर्श काल कहा है।” – वैलेंटाइन 

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