ओवर हेड प्रोजेक्टर क्या है ? ओवर हेड प्रोजेक्टर की उपयोगिता

छात्र सम्प्रेषण की प्रभावशीलता को बढ़ाने तथा कक्षा में अनुशासन को बनाए रखने में ओवर हेड प्रोजेक्टर का विशेष महत्त्व होता हैं।

ओवर हेड प्रोजेक्टर क्या है ?

ओवर हेड प्रोजेक्टर को अध्यापक एक मेज पर रखता है और श्यामपट्ट पर लगी स्क्रीन पर अपना ध्यान रखता है। इस तकनीक में चाक तथा डस्टर का उपयोग नहीं किया जाता है।

इस प्राविधि के अन्तर्गत सम्बंधित विषय पर विभिन्न ट्रांसपेरेंसी तैयार कर ली जाती है। उन्हें एक बड़े प्लेटफ़ार्म पर रखकर लेंस के द्वारा अध्यापक के पीछे पर्दे पर दिखाया जाता है। इन विशेषताओं के कारण इसे ओवर हेड प्रोजेक्टर कहा जाता है।

ओवर हेड प्रोजेक्टर में अध्यापक प्रदर्शित विषयसामग्री पर अपने विचार छात्रों के समक्ष रखता जाता है।

ट्रांसपेरेंसी बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें 

ट्रांसपेरेंसी बनाते समय कुछ महत्वपूर्ण विन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए जो नीचे दिए गये हैं –

  • ओवर हेड प्रोजेक्टर का प्रयोग करने से पहले पूर्वाभ्यास कर लेना चाहिए।
  • ट्रांसपेरेंसी पर लिखने के लिए मार्करपेन का उपयोग करना चाहिए।
  • अंकित चित्र / सन्देश / विवरण साफ़ व पढ़ने योग्य व सटीक होनी चाहिए।
  • अंकित लाइने थोड़ी मोटी होनी चाहिए।
  • इसका उपयोग तब किया जाता है जब ज्यादा छात्रों को पढाना हो या इसका उपयोग सेमिनारों, वर्कशाप तथा सम्मेलनों आदि में किया जाता है।

ओवर हेड प्रोजेक्टर की उपयोगिता

ओवर हेड प्रोजेक्टर की कुछ सीमायें भी हैं जैसे चाक व बोर्ड की अपेक्षा अधिक व्ययपूर्ण बिजली की आवश्यकता आदि होती है।

ओवर हेड प्रोजेक्टर की उपयोगिता निम्न प्रकार है –

  • ओवर हेड प्रोजेक्टर के माध्यम से गृह – निर्मित वस्तुओं को पर्दे पर दर्शाया जा सकता है।
  • ओवर हेड प्रोजेक्टर के माध्यम से सम्पूर्ण कक्षा को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • ओवर हेड प्रोजेक्टर के माध्यम से असंभव विभिन्न घटनाओं को दर्शाया जा सकता है।
  • अध्यापक इस माध्यम का प्रयोग छात्रों के ध्यान को केन्द्रित करने के लिए करता है।
  • ओवर हेड प्रोजेक्टर के लिए अँधेरे कमरे को उपयोग में लाया जाता है तथा एक तैयार ट्रांसपेरेंसी का प्रयोग किया जाता है।

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