ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा (1813-1944) | British Kalin Shiksha

ब्रिटिश कालीन शिक्षा के कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं थे फिर भी कुछ बिन्दुओं के सन्दर्भ में अध्ययन किया जा सकता है –

  • भारतीयों का बौद्धिक व नैतिक विकास।
  • भारत में यूरोपियन साहित्य तथा विज्ञान का विकास।
  • भारतीयों का आर्थिक विकास।
  • भारतीयों को अंग्रेजी शासन में सहायता के लिए तैयार करना।

शिक्षा के पाठ्यक्रम

ब्रिटिश कालीन शिक्षा में यूरोपियन साहित्य तथा विज्ञान को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था इसके साथ ही इतिहास, भूगोल, गणित, सामाजिक विषय आदि विषयों की शिक्षा भी दी जाती थी।

छन्नीकरण का सिद्धांत ब्रिटिश कालीन शिक्षा की एक महत्वपूर्ण घटना थी।

ब्रिटिश कालीन शिक्षा तथा शिक्षण संस्थान 

  • इस काल की शिक्षा में शिक्षा कई स्तरों में दी जाती थी। प्राथमिक, मिडिल, माध्यमिक, विश्वविद्यालय आदि के स्तर पर शिक्षण संस्थान भी स्थापित किये गये थे।
  • ब्रिटिश काल में शिक्षण विधि को लेकर कोई विशेष परिवर्तन नहीं किया गया था पूर्व की भांति व्याख्यान विधि का प्रयोग अधिक किया गया था।
  • ब्रिटिश काल में अध्यापक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया तथा उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी।
  • ब्रिटिश कालीन शिक्षा में सरकार द्वारा शिक्षा के उन्नयन हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाती थी।
  • 1937 ई० में बेसिक शिक्षा योजना ने भारतीयों की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किये।
  • इस काल की शिक्षा में औपचारिक शिक्षा के अन्तर्गत व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली का शुभारम्भ हुआ जिसमें मौखिक, लिखित तथा क्रियात्मक परीक्षाएं आयोजित की जाती थी।
  • इस काल की शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक तथा तकनीकि शिक्षा का शुभारम्भ हुआ जिसके अन्तर्गत कृषि विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज तथा तकनीकी शिक्षण संस्थाएं खोली गयी।
  • अध्यापक – छात्र सम्बन्ध केवल औपचारिक रह गए थे।
  • प्रारम्भिक ब्रिटिश काल में महिला शिक्षा उपेक्षित रही किन्तु बाद के समय में इसे लेकर महत्वपूर्ण कार्य किये गये।

ब्रिटिश शिक्षा की कमियाँ 

  • अस्पष्ट शिक्षा के उद्देश्य।
  • शिक्षा का अंग्रेजी माध्यम।
  • भारतीय शिक्षण संस्थानों तथा भारतीय संस्कृति की उपेक्षा।
  • अद्योगामी सिद्धांत का अनुशरण।
  • राष्ट्रीय चरित्र के विपरीत शिक्षा।
  • शिक्षा पर सरकार का अधिक नियंत्रण।

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