गणित का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकृति

गणित का अर्थ 

गणित वह शास्त्र है जिसमे गणनाओं की प्रधानता होती है अर्थात गणित अंक, अक्षर, चिन्ह, आदि संक्षिप्त संकेतों का वह विज्ञान है जिसकी सहायता से परिणाम, दिशा तथा स्थान का बोध होता है।

गणित विषय का आरम्भ गिनती से हुआ है और संख्या पध्दति इसका एक विशेष क्षेत्र है।

वेदांग शास्त्रों में गणित को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है। प्राचीन भारत में गणित में संख्या, गणना, ज्योतिष एवं क्षेत्रगणित सम्मलित थे। गणित में आने वाली क्रियाओं को करने के लिए लेखन – सामग्री का प्रयोग किया जाता था।

गणित की परिभाषाएँ 

गणित की कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाएँ नीचे दी गई हैं –

लॉक के अनुसार, “गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन या मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।”

गैलिलियो के अनुसार, “गणित वह भाषा है जिसमे परमेश्वर ने सम्पूर्ण जगत या ब्रह्माण्ड को लिख दिया है।”

रॉस के अनुसार, “गणित, विज्ञान की रानी है।”

गिब्स के अनुसार, “गणित एक भाषा है।”

गणित की प्रकृति 

गणित की प्रकृति को हम निम्नलिखित बिन्दुओं के द्वारा समझ सकते हैं –

  • गणित में संख्याएं, स्थान, दिशा तथा माप – तौल का ज्ञान प्राप्त किया जाता है।
  • गणित विभिन्न नियमों, सूत्रों, सिद्धांतो आदि में संदेह की सम्भावना नहीं रहती है।
  • गणित, विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के अध्ययन में सहायक ही नहीं, बल्कि उनकी प्रगति तथा संगठन की आधारशिला है।
  • गणित के नियम, सिद्धांत, सूत्र सभी स्थानों पर एक समान होते हैं जिससे उनकी सत्यता की जांच किसी भी समय तथा स्थान पर की जा सकती है।
  • गणित के ज्ञान का उपयोग विज्ञान के विभिन्न शाखाओं तथा अन्य अन्य विषयों के अध्ययन में किया जाता है।
  • गणित ज्ञान का आधार निश्चित होता है जिससे उस पर विश्वास किया जा सकता है।
  • गणित से बालकों में स्वस्थ तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है।
  • गणित के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ हैं।
  • गणित में अमूर्त प्रत्ययों को पूर्व रूप से परिवर्तित किया जाता है, साथ ही उनकी व्याख्या भी की जाती है।

गणित का विद्द्यालय पाठ्यक्रम में महत्त्व 

गणित का विद्द्यालय के पाठयक्रम में एक महत्वपूर्ण स्थान होता है। गणित पाठ्यक्रम के महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं की सहायता से समझा जा सकता है –

  • शिक्षा की प्रक्रिया व्यवस्थित करने में सहायक है।
  • समय का सदुपयोग करने में सहायक है।
  • छात्रों का मूल्यांकन करने में हेतु आवश्यक है।
  • चरित्र – निर्माण में सहायक है।
  • शिक्षा के उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक है।
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