ईसा मसीह

ईसा मसीह ईसाई धर्म के प्रवर्तक थे| इन्हे अंग्रेजी भाषा में Jesus कहते हैं| आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व इनका जन्म फिलिस्तीन के बेथलहम नामक नगर में हुआ था| इनके पिता का नाम जोसेफ (यूसुफ़ ) और माता का नाम मरियम ( मैरी ) था|

 
पादरियों ने ईसा मसीह पर प्रजा को भङकाने और धर्म विरुद्ध का आरोप लगाया जिसकी वजह से उन्हें प्राण दण्ड दिया गया| जब उन्हें प्राण दण्ड दिया गया था तो उनकी आयु मात्र 33 वर्ष की थी| ईसा मसीह को क्रॉस पर लटकाकर प्राण दण्ड दिया गया था| इसलिए ईसाइयों में क्रॉस को धार्मिक चिन्ह मन जाता है|
 
ईसा मसीह का जन्म उत्सव ‘क्रिसमस’ पर्व के रूप में 25 दिसम्बर को प्रत्येक वर्ष बड़ी ही धूम – धाम से बनाया जाता है| इस दिन गिरजाघरों को खूब सजाया जाता है| लोग गिरजाघरों में जाकर मोमबत्तियां जलाते हैं और पूर्व रात्रि को बारह बजे गिरजाघरों की घंटियां बजाते हैं|
 
ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस पर्व का आरम्भ सांताक्लॉज  के समय से हुआ था| फ़ादर सांताक्लॉज को संत निकोलस के नाम से भी जाना जाता है|
 
फ़ादर सांताक्लॉज बहुत ही धनवान और दयालु व्यक्ति थे| क्रिसमस पर्व पर किसी वृद्ध व्यक्ति को लाल वेश – भूषा पहनाकर बच्चो – और व्यक्तियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है| जिसे फ़ादर सांताक्लॉज का प्रतीक मन जाता है|
 
 
ईसा मसीह लोगो से बहुत प्रेम करते थे जब वह उपदेश देते थे तो हजारो लोग उनके चारो ओर एकत्रित हो जाते थे वह लोगो को कहानियों के माध्यम से शिक्षा देते थे|
 

ईसा मसीह के उपदेश

ईसा मसीह के सन्देश बाइबिल ग्रन्थ में संग्रहित किये गए है| बाइबिल ईसाइयो का पबित्र ग्रन्थ है इसमें बहुत सारे पुराने सिद्धांत और नियम शामिल है|
  1. पाप से घृणा करो पापी से नहीं|
  2. बुराई के बदले बुराई मत करो|
  3. पापी को दण्ड देना ईश्वर का कार्य है तुम्हारा नहीं|
  4. तुम भलाई से बुराई पर विजय प्राप्त करो|
  5. अपने सताने वालों को भी आशीर्वाद दो – अभिशाप नहीं|
  6. अहंकारी मत बनो|
  7. दींन लोगों के साथ मिलजुलकर रहो|
  8. अपने आप को बहुत बुद्धिमान मत समझो|
  9. दूसरों पर दोष न लगाओ|
  10. जैसा तुम चाहते हो कि मनुष्य तुम्हारे साथ करे, वैसा ही तुम उनके साथ करो|
  11. सब स्त्रियों को माँ – बहन समझो|
  12. सभी मनुष्यो को उपजाऊ भूमि की तरह बनना चाहिए|

ईसा मसीह के शिष्य

ईसा मसीह के शिष्य उनके साथ हमेशा रहा करते थे तथा उनके उपदेशो को सुनते थे ईसा मसीह के कुल बारह शिष्य माने जाते थे|
 
  1. पीटर
  2. एंड्रयू
  3. जेम्स ( जाबेदी का बेटा )
  4. जान
  5. फिलिप
  6. बर्थोलोमियू
  7. मैथ्यू
  8. थामस
  9. जेम्स (अल्फ़ाइयुज का बेटा )
  10. संतजुदास
  11. साइमन द जिलोट
  12. मत्तिय्याह

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